आखिर निकल ही गया
21 दिसंबर का वो मनहूस दिन,
धरी की धरी रह गयी
सारी आशंकायेँ,
और
भविष्यवाणियां भी ।
सबके चेहरोँ पर खुशी है
आखिर खत्म होने से
बच गयी धरती,
लेकिन
इंसान के अंदर के,
इंसान के
खत्म हो जाने का
शोक भला कौन मनाता है ?
-बी. एल. 'पारस'
21 दिसंबर का वो मनहूस दिन,
धरी की धरी रह गयी
सारी आशंकायेँ,
और
भविष्यवाणियां भी ।
सबके चेहरोँ पर खुशी है
आखिर खत्म होने से
बच गयी धरती,
लेकिन
इंसान के अंदर के,
इंसान के
खत्म हो जाने का
शोक भला कौन मनाता है ?
-बी. एल. 'पारस'