Tuesday, 9 April 2013

आदमी

(1)
भेङिये सा खूँखार
सियार सा चतुर
कौवे सा काला
साँप सा कृतघ्न
कितना बहुआयामी
बन गया है
आदमी ।

(2)
पढकर अखबार मेँ
मृतकोँ की संख्या
एक आदमी
कहता है-
जनसंख्या फिर भी बढ रही है ।

(3)
ना उसे कोई बुरा कहता है
ना किसी को वो बुरा कहता है
आदमीयत नही तो क्या
आदमी तो है ना ।

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