Saturday, 15 October 2016

ग़ज़ल

बोलते जो  बोलने दे,
आग में भी झोंकने दे |

भींचकर जो होठ बैठे,
सच सुना,फिर चौंकने दे |

ये कुत्ते काट नही सकते,
भौंकतें हैं, भौंकने दे |

झोंपड़ी को ले उड़ेगी,
आँधियों को रोकने दे |

तान के सर झूठ खड़ा
रुक ! मुझको टोकने दे |

प्यार करता हूँ कि नही,
रात भर तो सोचने दे |

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